Wednesday, January 6, 2010

मुझे बड़ा नहीं होना

शाम एक छोटे से घर मैं

किलकारी गूंजी थी

नया मेहमान अभी अभी

गरब की सीडियूं से

माँ की गोद के फर्श पर

लोट रहा था ।

एक आवाज़ कानूं में गूंजी

लड़का है या लड़की??

मेहमान गहरी सोंच में

यह समझने की कोशिश करने लगा

खातिरदारी में फर्क है

किसी ने बताया क्यूँ नहीं ?

वोही बन के आ जाता

जिस का स्वागत हो बालाईयुं से

जिस की एक हंसी पे वार देते सारा जहाँ

जिस के लड़खड़ाते कदम ज़मीन पे पड़ते ही

सारा घर उथल पुथल हो जाता

किसी ने बताया क्यूँ नहीं ????