अंगारों की तपिश तू
पतोँ की सरसराहट तू
सरकती हुई ओढ़नी तू
चूड़ियों की खनक तू
गालोँ की लाली तू
नूर -इ -इश्क़ का सवाली तू
भीड़ में ख़ामोशी तू
गलियूं का सन्नाटा तू
मेरी सोच में तू
मेरे ज़िस्म की कंपन तू
बहकता हुआ पल तू
आँखोँ का अकेलापन तू
तू ही तू
हर सू। ...
पतोँ की सरसराहट तू
सरकती हुई ओढ़नी तू
चूड़ियों की खनक तू
गालोँ की लाली तू
नूर -इ -इश्क़ का सवाली तू
भीड़ में ख़ामोशी तू
गलियूं का सन्नाटा तू
मेरी सोच में तू
मेरे ज़िस्म की कंपन तू
बहकता हुआ पल तू
आँखोँ का अकेलापन तू
तू ही तू
हर सू। ...