Thursday, July 30, 2009

क्या हो जो .....

दिल की गहराई जो नाप सको तो
क्या जाने क्या हो
हर लम्हा तेरे साथ न हो तो
क्या जाने क्या हो ।

कोयल की मदहोश आवाज़
जो कानओ में पड़ जाती है .
कुछ गीत मधुर सा गाने को
मन ही मन ललचाती है ।
एक धुन मुझे भी दे दो तो
क्या जाने क्या हो।

रात का खामोश पहर
कोई मीठा सा दर्द ले कर सरकता है
पल पल, हर पल लफ्जों का
तूफ़ान दिल में उमड़ता है
एक गीत मुझे भी दे दो तो
क्या जाने क्या हो .

मन में दर्द छुपा सदियों का
जाकर किसे दिखलायें यहाँ .
कौन है जो मरहम जारा सा
खुले घाव पे रख दे तो ।
एक हाथ बड़ा कर थाम ले कोई तो
क्या जाने क्या हो.

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